एक और दूसरी तरफ चीन की वो चाल बाजी जो हर कीमत पर इसे कमजोर साबित करना चाहता है। ग्रीस के तंगरा एयरबेस पर हुई एक घटना ने सबको चौंका दिया। चार चीनी नागरिक राफेल की जासूसी करते रंगे हाथ पकड़े गए।
सिर्फ तस्वीरें खींच रहे या रच रहे थे ? एक बड़ा षड्यंत्र? आइए खोलते हैं इस जासूसी ऑपरेशन की परतें और समझते हैं चीन की उस चाल को जिसका निशाना भारत की वायु शक्ति सबसे पहले जानते हैं क्या हुआ तंगरा में दरअसल ग्रीस का तंगरा एयर बेस जहाँ तैनात है फ्रांसीसी राफेल जेट्स।और एयरस्पेस इंडस्ट्री की अहम सुविधाएं वहीं चार चीनी नागरिक, दो पुरुष, एक महिला और एक युवक संदिग्ध स्थिति में कैमरे लेकर फोटो खींचते पाए गए। सुरक्षा गार्ड्स ने रोका लेकिन वे एक पुलिया की तरफ बढ़े और छिपकर फोटो खींचते रहे। एयर फोर्स पुलिस ने तुरंत हिरासत में लिया।
उनके कैमरो से बहुत सारी संवेदनशील तस्वीरें बरामद की गई है। ग्रीस की इन्टेलिजेन्स एजेंसियों ने इसे जासूसी का गंभीर मामला कहते हुए उन्हें गिरफ्तार किया और। सवाल यह है कि वह चारों चीनी रिपेयर की गुप्त तरीके से तस्वीर क्यों खींच रहे थे ? आपको याद होगा मई 2025 जब भारतीय वायु सेना ने।ऑन परेशान सिंधुर में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर राफेल से हमले किए। उच्च स्तरीय सटीकता, गुप्त घुसपैठ और बिना किसी नुकसान के मिशन की सफलता। रफाल की ताकत दुनिया ने देखी। इसके बाद से कई देश राफेल को खरीदने में रुचि दिखाने लगे जिससे चीनी जेट ज़ी 10
और ऐफ़ सी 31 की बिक्री प्रभावित हुई। चलिए अब जानते हैं कि चीन की साजिश जासूसी या टेक्नोलॉजी चोरी? जानकारों का मानना है की तकनीक को समझ कर उसकी टेक्नोलॉजी को जानकर और इससे राफेल की बिक्री को रोकना हैअंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भ्रम फैलाना अगर राफेल का डेटा किसी दुश्मन देश के हाथ लग जाए तो वो राफेल के खिलाफ़ डिफेंस सिस्टम बना सकता है। भारत और ग्रीस के बीच हाल ही में सुरक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ा है। 2024 में दोनों देशों ने डिफेंस एम ओह यु साइन किया।
ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया है और भारत को भी उतनी ही गंभीरता दिखानी चाहिए अगर चीन राफेल की तकनीक चुराने में सफल हो जाए। तो इसके तीन खतरे भारत पर होंगे। आई ए ऐफ़ की ताकत पर सीधा असर भारत की रिटेन्स कैपेबिलिटी कमजोर चीन को राफेल काउंटर टेक्नोलॉजी बनाने में बढ़त भारत को जरूरत है अब अपने एयर बेस और डिफेंस इंडस्ट्री की सुरक्षा बढ़ाने की काउंटर इन्टेलिजेन्स सिस्टम को अपग्रेड करने की साइबर सुरक्षा।और डिजिटल निगरानी सिस्टम को और तेज करने की जासूसी सिर्फ युद्ध से पहले की तैयारी नहीं, ये आज के जमाने का नया युद्ध है। ग्रीस में जांच जारी है। क्या ये लोग अकेले थे या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा? क्या ये चीन की पी एलए से जुड़े हुए थे? क्या ये पहले भी? राफेल बेस देशों में देखे गए हैं।








