भारत की दूरसंचार कंपनियाँ डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ एकजुट

भारत की शीर्ष दूरसंचार कंपनियों का ऐतिहासिक सहयोग: डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ एकजुट लड़ाई

डिजिटल भारत की तीव्र प्रगति के साथ-साथ साइबर अपराध का खतरा भी उसी रफ्तार से बढ़ रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारत की तीन सबसे बड़ी मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर कंपनियों – भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया  ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए GSMA ओपन गेटवे फ्रेमवर्क के तहत एक संयुक्त पहल की घोषणा की है। यह सहयोग न केवल भारतीय दूरसंचार इतिहास में एक मील का पत्थर है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत का संकेत भी देता है।

भारत में साइबर अपराध से वित्तीय नुकसान (2022-2024) – India’s Cybercrime Financial Losses

साइबर अपराध का बढ़ता संकट

भारत में डिजिटल धोखाधड़ी की स्थिति अत्यंत गंभीर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारतीयों को साइबर अपराधियों के हाथों ₹22,845 करोड़ से अधिका नुकसान हुआ है, जो पिछले वर्ष के ₹7,465 करोड़ से 206% अधिक है। यह वृद्धि इतनी तीव्र है कि विशेषज्ञ इसे एक राष्ट्रीय आपातकाल के रूप में देख रहे हैं।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में वित्तीय धोखाधड़ी की 36.37 लाख घटनाएं रिपोर्ट की गईं, जो 2023 की 24.42 लाख घटनाओं से काफी अधिक है। साइबर अपराध की रिपोर्ट करने वाली घटनाओं में निरंतर वृद्धि देखी गई है – 2022 में 10.29 लाख मामले, 2023 में 15.96 लाख और 2024 में 22.68 लाख मामले दर्ज किए गए।​

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के विश्लेषण के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में भारत ने साइबर धोखाधड़ी के कारण प्रति माह औसतन ₹1,000 करोड़ का नुकसान झेला है, जिससे कुल नुकसान ₹7,000 करोड़ तक पहुंच गया है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो 2025 में वार्षिक नुकसान ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है, जो भारत की जीडीपी का 0.7% होगा।​

GSMA की चौंकाने वाली रिपोर्ट

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में जारी की गई GSMA की “इंडिया कंज्यूमर स्कैम रिपोर्ट 2025” ने डिजिटल धोखाधड़ी की व्यापकता को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 53% भारतीय उपभोक्ता घोटालों का शिकार हुए हैं, जिनमें से 10% केवल पिछले वर्ष ही पीड़ित बने हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 14% पीड़ितों को ऐसा भारी वित्तीय नुकसान हुआ है जो उन्हें आज भी परेशान करता है।

GSMA भारत उपभोक्ता घोटाला रिपोर्ट 2025 – मुख्य आंकड़े

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 58% भारतीय उपभोक्ता घोटालों को लेकर “बहुत चिंतित” हैं, और 84% का मानना है कि घोटाले बढ़ रहे हैं। इनमें से 42% लोगों का कहना है कि यह खतरा “तेजी से बढ़ रहा है”।​

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में ऐतिहासिक घोषणा

9 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में भारत की तीनों प्रमुख दूरसंचार कंपनियों ने अपनी साझेदारी का अनावरण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस कार्यक्रम में “नवाचार से रूपांतरण” (Innovate to Transform) के थीम के तहत 150 से अधिक देशों के 1.5 लाख से अधिक आगंतुक शामिल हुए।​

इस चार दिवसीय कार्यक्रम में ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, टेलीकॉम में सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्युनिकेशन, 6G, और फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्टार्टअप्स द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम, क्वांटम कम्युनिकेशन और 6G जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुतियों की सराहना की।​

GSMA ओपन गेटवे: तकनीकी क्रांति का आधार

GSMA ओपन गेटवे पहल एक वैश्विक फ्रेमवर्क है जो मोबाइल ऑपरेटर नेटवर्क्स के लिए मानकीकृत API (एप्लिकेशन प्रोग्रामेबल इंटरफेस) प्रदान करता है। यह पहल अब 79 से अधिक मोबाइल ऑपरेटर समूहों द्वारा समर्थित है, जो 291 नेटवर्क्स का प्रतिनिधित्व करते हैं और दुनिया के लगभग 80% मोबाइल कनेक्शन्स को सेवा प्रदान करते हैं।​

पारंपरिक रूप से, दूरसंचार उद्योग एक बंद और संरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र रहा है, जहां बड़े ऑपरेटर और नियामक पहुंच को नियंत्रित करते थे। GSMA ओपन गेटवे इस एकरूपता की कमी को दूर करने के लिए मानकीकृत API का एक फ्रेमवर्क प्रदान करता है, जो सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को वैश्विक मोबाइल नेटवर्क्स तक सार्वभौमिक पहुंच देता है।​

संयुक्त पहल की तकनीकी विशेषताएं SIM स्वैप API: पहली रक्षा पंक्ति

तीनों ऑपरेटरों ने पहले से ही SIM स्वैप API लॉन्च की है, जो बैंकों को “अकाउंट टेकओवर अटैक” से बचाने में मदद करती है। इस तकनीक में धोखेबाज सामाजिक इंजीनियरिंग तकनीकों और चुराए गए व्यक्तिगत डेटा का उपयोग करके खाता स्वामी के SIM कार्ड पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं।​

SIM स्वैप API मोबाइल नेटवर्क पर SIM कार्ड की सक्रियता की तारीख की रीयल-टाइम जांच करता है। यह बताता है कि क्या कोई व्यक्तिगत मोबाइल लाइन दूसरे SIM कार्ड में पोर्ट की गई है। जब कोई लेन-देन संदिग्ध लगता है, तो बैंक इस API से पूछताछ कर सकता है और SIM स्वैप की जानकारी को अपने जोखिम निर्णय इंजन में फीड कर सकता है।​

नंबर वेरिफिकेशन API: भविष्य की सुरक्षा

तीनों ऑपरेटरों की योजना 2025 के अंत तक CAMARA-आधारित नंबर वेरिफिकेशन API लॉन्च करने की है। यह API SMS वन-टाइम पासवर्ड (OTP) का एक अधिक सुरक्षित विकल्प है। यह व्यवसायों को मोबाइल उपयोगकर्ता की पहचान की पुष्टि करने की अनुमति देता है, उनके फोन नंबर को रीयल-टाइम नेटवर्क डेटा के साथ मिलाकर।​

नंबर वेरिफिकेशन API दो तंत्रों का लाभ उठाता है: नेटवर्क-आधारित (जहां नेटवर्क ऑपरेटर जानता है कि नेटवर्क-कनेक्टेड मोबाइल फोन किस ग्राहक का है) और SIM-आधारित (उपयोगकर्ता के डिवाइस में स्थापित ग्राहक के SIM की पहचान पर आधारित प्रमाणीकरण तंत्र)।​

CAMARA API: मानकीकरण की शक्ति

CAMARA API, जो GSMA द्वारा प्रमाणित हैं, डेवलपर्स को ऐसी सेवाएं बनाने में मदद करते हैं जो हर भाग लेने वाले मोबाइल नेटवर्क के साथ काम करती हैं। इससे प्रत्येक ऑपरेटर अपने डेटा, नीति और राजस्व पर नियंत्रण रख सकता है। यह सॉफ्टवेयर एक इंटरफेस, इंटरऑपरेबिलिटी और वैश्विक क्रॉस-कंट्री कवरेज प्रदान करता है।

व्यक्तिगत पहलों से आगे: एकीकृत रक्षा भारती एयरटेल की अग्रणी भूमिका

भारती एयरटेल ने इस सहयोग में अग्रणी भूमिका निभाई है। मई 2025 में कंपनी ने रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया को एक संयुक्त दूरसंचार धोखाधड़ी पहल के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा। एयरटेल ने पहले से ही एक धोखाधड़ी का पता लगाने वाला समाधान तैनात किया है जो व्हाट्सऐप, फेसबुक, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध लिंक और दुष्ट वेबसाइटों को सक्रिय रूप से ब्लॉक करता है।​

एयरटेल के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गोपाल विट्टल ने कहा, “हम स्पैम और वित्तीय धोखाधड़ी को समाप्त करने के मिशन पर हैं। पिछले एक साल में, हमारे AI-संचालित नेटवर्क समाधानों ने 48.3 बिलियन से अधिक स्पैम कॉल की पहचान की है और 3.2 लाख धोखाधड़ी भरे लिंक को ब्लॉक किया है।”​

भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के आंकड़ों के अनुसार, एयरटेल के एंटी-फ्रॉड पहलों के परिणामस्वरूप साइबर अपराध की शिकायतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वित्तीय नुकसान के मूल्य में 68.7% की गिरावट और एयरटेल नेटवर्क पर कुल साइबर अपराध की घटनाओं में 14.3% की गिरावट देखी गई है।​

वोडाफोन आइडिया के नवाचार

वोडाफोन आइडिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में अपने 5G और AI-संचालित समाधानों का प्रदर्शन किया, जिसमें एक नया API-आधारित धोखाधड़ी रोकथाम समाधान, एक AI-संचालित वॉयस स्पैम डिटेक्शन सिस्टम, और अपने मुख्य संचालन के लिए एक अपग्रेडेड नेटवर्क रक्षा और घटना प्रतिक्रिया सिस्टम शामिल था।​

Vi का वॉयस स्पैम डिटेक्शन सिस्टम रीयल-टाइम में स्पैम और धोखाधड़ी भरी कॉल की पहचान करता है और उन्हें फ्लैग करता है। उन्नत AI मॉडल, वेब क्रॉलर और यूजर फीडबैक द्वारा संचालित, यह संदिग्ध नंबरों को ग्राहक तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लेता है। जब कोई संभावित धोखाधड़ी भरी कॉल आती है, तो उपयोगकर्ता के फोन स्क्रीन पर “संदिग्ध स्पैम” दिखता है।​

सरकारी पहल और समर्थन वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI)

दूरसंचार विभाग (DoT) ने मई 2025 में “वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI)” लॉन्च किया, जो डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) का हिस्सा है। यह एक जोखिम-आधारित मेट्रिक है जो मोबाइल नंबर को मध्यम, उच्च या बहुत उच्च वित्तीय धोखाधड़ी के जोखिम के साथ जुड़े होने के रूप में वर्गीकृत करता है।​

FRI का डेटा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), DoT के चक्षु प्लेटफॉर्म, और बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा साझा की गई जानकारी से आता है। दूरसंचार राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने बताया कि मई 2025 से, AI-संचालित वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक ने 4.8 मिलियन धोखाधड़ी भरे लेन-देन को ब्लॉक किया है, भारतीय नागरिकों के ₹140 करोड़ बचाए हैं।​

फोनपे जैसे प्रमुख UPI प्लेटफॉर्म FRI को अपने सिस्टम में एकीकृत कर रहे हैं। फोनपे ने बहुत उच्च FRI मोबाइल नंबरों से जुड़े लेन-देन को अस्वीकार करने और फोनपे प्रोटेक्ट फीचर के हिस्से के रूप में ऑन-स्क्रीन अलर्ट प्रदर्शित करने के लिए इसका उपयोग किया है।​

राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2025

राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2025 में साइबर सुरक्षा को एक मुख्य स्तंभ के रूप में स्थापित किया गया है। नीति में दूरसंचार पहचानकर्ताओं (IMEI सहित) के दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी नियामक ढांचा स्थापित करने, मोबाइल नंबर सत्यापन सेवा शुरू करने, और साइबर अपराध के लिए दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए ‘वन स्टॉप सॉल्यूशन’ के माध्यम से नागरिक सशक्तिकरण और संलग्नता की व्यवस्था शामिल है।​

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक मानक एशिया-प्रशांत में विस्तार

GSMA ओपन गेटवे पहल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही है। मलेशिया जैसे देशों में पहले से ही एकीकृत नंबर वेरिफिकेशन API सिस्टम की सफल स्थापना हुई है। अर्जेंटीना में भी GSMA ओपन गेटवे के तहत पहली API धोखाधड़ी और डिजिटल घोटाले की रोकथाम पर केंद्रित हैं।​

यूके में चार प्रमुख मोबाइल ऑपरेटर – वोडाफोन, वर्जिन मीडिया O2, BT/EE और थ्री – ने CAMARA API पर सहयोग की घोषणा की है ताकि व्यवसायों, क्लाउड प्रदाताओं और ऐप डेवलपर्स को ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने में मदद मिल सके।​

दक्षिण-पूर्व एशिया की चुनौतियां

GSMA की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में भी डिजिटल घोटाले एक बढ़ती चिंता हैं। क्षेत्र में लगभग दस में से एक उपभोक्ता (8%) पिछले साल घोटाले का शिकार हुआ। इनमें से 84% उत्तरदाताओं को डर है कि घोटाले बढ़ रहे हैं।​

चुनौतियां और भविष्य की दिशा तकनीकी चुनौतियां

फेडरेटेड नेटवर्क सर्विसेज को लागू करना एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें प्रत्येक ऑपरेटर को अपने डेटा, नीतियों और राजस्व धाराओं पर नियंत्रण बनाए रखना होता है। CAMARA API के तकनीकी स्तर पर, कार्यान्वयन मानकीकृत इंटरफेस का उपयोग करता है जो डेवलपर्स को भाग लेने वाले ऑपरेटर नेटवर्क्स में समान रूप से काम करने वाली धोखाधड़ी रोकथाम और पहचान सत्यापन सेवाएं बनाने के लिए उपकरण प्रदान करता है।​

नियामक ढांचा

दूरसंचार साइबर सुरक्षा संशोधन नियम 2025 का मसौदा दूरसंचार लाइसेंसियों से आगे बढ़कर दूरसंचार पहचानकर्ताओं का उपयोग करने वाली संस्थाओं तक नियामक दायरे का विस्तार करता है। इसमें फिनटेक, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हो सकती हैं।​

साइबर अपराध की बदलती प्रकृति

2025 में भारत के फिनटेक धोखाधड़ी के पैटर्न विकसित हो रहे हैं और इसमें जटिल फिशिंग, सिंथेटिक पहचान धोखाधड़ी और अकाउंट टेकओवर शामिल हैं। फिशिंग कुल रिपोर्ट की गई फिनटेक धोखाधड़ी का 38% कारण है। NASSCOM-DSCI के शोध के अनुसार, वास्तविक और बनावटी जानकारी दोनों का उपयोग करके संकलित नकली पहचान 2022 से 450% बढ़ी हैं।​

निष्कर्ष और आगे का रास्ता

भारत की तीन सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों का यह सहयोग डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। GSMA ओपन गेटवे फ्रेमवर्क के तहत SIM स्वैप और नंबर वेरिफिकेशन API का संयुक्त कार्यान्वयन न केवल तत्काल सुरक्षा लाभ प्रदान करता है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा नवाचारों के लिए एक मजबूत आधार भी स्थापित करता है।

यह पहल प्रतिस्पर्धा से सहयोग की ओर एक आदर्श बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है, जो दिखाती है कि कैसे निजी कंपनियां और सरकारी एजेंसियां राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक हित में एक साथ काम कर सकती हैं। जैसे-जैसे डिजिटल धोखाधड़ी अधिक परिष्कृत होती जा रही है, ऐसे सहयोगी दृष्टिकोण अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

भारत के डिजिटल भविष्य की सुरक्षा के लिए, यह आवश्यक है कि तकनीकी नवाचार, नियामक सहायता और उद्योग सहयोग का यह त्रिकोणीय दृष्टिकोण जारी रहे। केवल तभी हम एक सुरक्षित, विश्वसनीय और समृद्ध डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण कर सकते हैं जो प्रत्येक भारतीय नागरिक की आकांक्षाओं को पूरा कर सके।

 

DPS Tv Bharat
Author: DPS Tv Bharat

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