भारत का तेल खेल परिवर्तक: नया खिलाड़ी कौन है

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दुनिया भर के देश रूस, यूक्रेन की जंग और इजराइल ईरान के बीच हो रहे झगड़े को लेकर फंसी हुई है। लेकिन इधर भारत बिकल्पों की तलाश में इधर उधर।
घूम रहा है। जी हाँ, हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच देशों का दौरा किया था, लेकिन ये दौरे सिर्फ ऐसे ही नहीं थे। इनके बोहुत खास मायने थे। दुनिया भर में जब युद्ध छिड़ा हुआ है, तब ग्लोबल साउथ को लेकर भारत का विज़न कितना बड़ा है, ये आप जल्द जान जाएंगे।

अफ्रीकी देशों की तरफ बढ़ता भारत ये दुनिया को बता रहा है कि अब विकल्पों की तरफ पूरी दुनिया को बढ़ना चाहिए। जहाँ रूस और ईरान पर तेल खरीददारी को लेकर भारत पूरी तरीके से निर्भर हो चुका था, वहीं दूसरी तरफ अब तेल को लेकर भारत नई विकल्पों को तलाश रहा है और इसका सबसे बेहतरीन और शांत विकल्प।

सिर्फ अफरीका ही हो सकता है। नतीजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफरीका का दौरा किया। अफरीकी देश नामीबिया पहुंचते ही प्रधानमंत्रीनरेंद्र  मोदी ने कई बातें कहीं लेकिन जो दुनिया को नज़र नहीं आया वो ये था की नामीबिया में मौजूद है तेल की वो खान जीस पर भारत की नज़र है।

प्रधानमंत्री मोदी का नामीबिया दौरा बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि उस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, एनर्जी और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अपने संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा शुरू कर दी।

यानी अलग अलग क्षेत्रों को लेकर नामीबिया के साथ संबंधों को स्थापित कर भारत नए विकल्पों को तलाशना शुरू कर चुका है। प्रधानमंत्री मोदी के नामीबिया दौरे की जानकारी देते हुए भारत के राजदूत राहुल श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि भारत नामीबिया से यूरेनियम और बाकी महत्वपूर्ण खनीज।
यानी क्रिटिकल मिनेरल्स के आयात पर विचार कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत नामीबिया से व्यापार साझेदारी बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। राजदूत ने ये साफ साफ कहा कि हमें नामीबिया के महत्वपूर्ण खनिजों में रुचि है और हमारी कुछ सरकारी कंपनियां यहाँ निवेश करना चाहेंगी।

हम नामीबिया से यूरेनियम निर्यात करने पर विचार कर रहे हैं। वही यूरेनियम जो रूस दुनिया को बेचता है, उसका एक और विकल्प भारत तलाश रहा है। महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर दुनिया भर के देशों में रुचि बढ़ी है, जिसमें भारत भी शामिल हो चुका है। ये खनीज आधुनिक तकनीकों

नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरण के लिए महत्वपूर्ण है। आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी ये बेहद अहम माने जाते हैं। इसके साथ साथ लिथियम कोबाल्ट निकल ग्रैफाइट रेयर अर्थ मिनरल्स, वही रेयर अर्थ मिनरल्स जिसे लेकर चीन।

लगातार भारत पर दबाव बना रहा है। उसके लिए भी नामीबिया एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। इन खनिजों को लेकर दुनिया भर में होड़ मची है। इन्हीं खनिजों के लिए दुनिया भर में झगड़ा है। चीन रूस पूरी दुनिया में अस्तित्व बनाने के लिए दुनिया भर के देशों पर प्रेशर क्रियेट करते हैं।
अमेरिका भी इसी राजनीति का हिस्सा है। लेकिन अब भारत नए विकल्पों की तरफ जाना चाहता है। ऐसे देश जिनके पास तेलों का भंडार हो, ऐसे देश जिनके पास खनिजों का भंडार और भारत की इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों में से एक है नामीबिया।

जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा हुआ। दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में नामीबिया में तेल और गैस का भी बड़ा खजाना मिला है। भारतीय राजदूत राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि भारत को नामीबिया के तेल और गैस में भी काफी रूचि है।

भारत अपने इस्तेमाल की 85 फीसदी से ज्यादा कच्चे तेल और गैस के लिए पूरी तरीके से निर्यात पर निर्भर रहता है और ये निर्भरता अलग अलग देशों पर अलग अलग परसेंटेज के हिसाब से है। इसमें हाल फिलहाल के सालों में रूस सबसे टॉप पर रहा और फिर ईरान, लेकिन रूस और ईरान के साथ जीस तरीके से झगड़ा हो रहा है। उसे देखते हुए भारत पर कई तरीके।

DPS Tv Bharat
Author: DPS Tv Bharat

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