55 लाख पंजाबियों के राशन कार्डों पर संकट: भगवंत मान बोले- “जब तक मैं सीएम हूं, कोई कार्ड नहीं कटेगा”

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55 लाख पंजाबियों के राशन कार्डों पर संकट: भगवंत मान बोले- “जब तक मैं सीएम हूं, कोई कार्ड नहीं कटेगा”

चंडीगढ़ से बड़ी खबर

पंजाब के लाखों गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा झटका तब सामने आया, जब केंद्र सरकार ने राज्य के 55

लाख राशन कार्ड धारकों को योजना से बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी। वजह बताई गई है – eKYC अपडेट न होना।

लेकिन इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ शब्दों में ऐलान किया कि,
👉 “जब तक मैं मुख्यमंत्री हूं, किसी गरीब का राशन कार्ड नहीं कटेगा। किसी को भूखा नहीं रहने देंगे।”

पंजाब में राशन कार्डों पर कैंची क्यों ?

पंजाब में कुल 1.53 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं। इनमें से सबसे गरीब और जरूरतमंद 55 लाख लोगों का मुफ्त राशन अब खतरे में है। जुलाई 2025 से ही करीब 23 लाख  लोगों का राशन कार्ड चुपचाप बंद कर दिया गया। अब सरकार ने चेतावनी दी है कि 30 सितंबर के बाद 32 लाख और लोगों का राशन बंद कर दिया जाएगा। यानी लगभग 55 लाख लोग राशन से वंचित हो जाएंगे। कारण बताया जा रहा है – eKYC अपडेट न होना।

गरीब परिवारों पर दोहरी मार – महंगाई और भूख

देशभर में पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी का असर साफ दिखाई दे रहा है। आटा, दाल, तेल और गैस सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं। मजदूरी और रोजगार के मौके घट रहे हैं। गांव और कस्बों के गरीब परिवार पहले ही पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में राशन कार्ड बंद होना उनके लिए सबसे बड़ा संकट है।
एक परिवार जो महीने का राशन सरकारी डिपो से पाता है, अचानक उससे वंचित हो जाए तो उसके लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाएगा।

भगवंत मान का सीधा आरोप केंद्र सरकार पर

 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा –”केंद्र की बीजेपी सरकार पंजाब के गरीबों से उनका हक छीनने की कोशिश कर रही है। जब तक मैं मुख्यमंत्री हूं, किसी गरीब का राशन कार्ड नहीं कटेगा। हम गरीबों को भूखा नहीं सोने देंगे।” सीएम मान ने आगे कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह गरीबों के हक की सुरक्षा करे, न कि उनकी परेशानियां बढ़ाए।

राजनीति का रंग: पंजाब बनाम केंद्र

यह मामला अब राजनीति का भी मुद्दा बन गया है। आम आदमी पार्टी सरकार कह रही है कि यह गरीबों के खिलाफ साजिश है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि “पारदर्शिता और फर्जी कार्डों को रोकने के लिए eKYC अनिवार्य है।” राशन वितरण में कई बार फर्जी कार्ड, डुप्लीकेट पहचान और गड़बड़ी की शिकायतें आती रही हैं। इसीलिए केंद्र ने eKYC लागू किया है। लेकिन सवाल यह है कि –क्या तकनीकी दिक्कतों या प्रक्रिया की वजह से असली गरीबों को उनका हक छीन लेना सही है ?

पंजाब के गांवों में हकीकत

ग्रामीण इलाकों में जाकर देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक है। कई बुजुर्गों और विधवाओं के पास मोबाइल या इंटरनेट की सुविधा नहीं है। बहुत से लोग उम्र और अशिक्षा की वजह से eKYC प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे। कई ग्रामीण इलाकों में बैंक और आधार सेवाएं सीमित हैं, जिसकी वजह से लोग समय पर अपडेट नहीं करा पाए। इसका नतीजा यह हुआ कि लाखों परिवार जुलाई से ही राशन से वंचित हो चुके हैं।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक और सामाजिक मामलों के जानकार मानते हैं कि –eKYC जरूरी है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन सरकार को चाहिए कि गरीबों को पर्याप्त समय और मदद दे। कोई भी असली जरूरतमंद परिवार भूख से न जूझे, इसके लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

पंजाब सरकार का रुख

सीएम मान ने एलान किया कि –कोई भी गरीब परिवार राशन से वंचित नहीं होगा। सरकार खुद गरीबों की मदद करेगी। अगर जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार अपने संसाधनों से राशन उपलब्ध कराएगी। यह बयान पंजाब की गरीब जनता के लिए राहत की खबर है।

जनता की आवाज

हमने कई राशन कार्ड धारकों से बात की। एक महिला बोली – “मेरे पति मजदूरी करते हैं। राशन से ही घर चलता है। अगर कार्ड कट गया तो बच्चे भूखे रह जाएंगे।” एक बुजुर्ग किसान ने कहा – “हमें तो पता ही नहीं था कि eKYC करानी है। राशन बंद कर दिया, अब कहां जाएं ?” यह आवाजें बताती हैं कि समस्या सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन-मरण का सवाल है।

सोशल मीडिया पर बहस

X पर #RationCard #Punjab जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग केंद्र सरकार पर गरीब विरोधी नीतियों का आरोप लगा रहे हैं। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि eKYC न कराना लापरवाही है।

सवाल उठते हैं

1. क्या तकनीकी कारणों से गरीबों का हक छीनना सही है?

2. क्या सरकार ने eKYC की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पर्याप्त कदम उठाए ?

3. क्या राज्य और केंद्र मिलकर ऐसा समाधान निकाल सकते हैं जिससे पारदर्शिता भी बनी रहे और गरीबों का राशन भी न रुके ?

आगे क्या ?

30 सितंबर के बाद अगर 32 लाख और लोगों का राशन बंद हुआ तो पंजाब में बड़ा सामाजिक संकट खड़ा हो सकता है। विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाएगा। गरीब परिवार आंदोलन और विरोध कर सकते हैं। पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव और बढ़ेगा।

निष्कर्ष

पंजाब में राशन कार्ड विवाद सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि गरीबों की जिंदगी और उनके पेट से जुड़ा मसला है।
तकनीक और पारदर्शिता अपनी जगह सही हैं, पर पर गरीब परिवारों की भूख मिटाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

सीएम भगवंत मान का यह बयान कि “जब तक मैं सीएम हूं, कोई कार्ड नहीं कटेगा” गरीब जनता को फिलहाल राहत जरूर देता है। लेकिन आने वाले समय में असली चुनौती यह होगी कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ऐसा रास्ता निकालें जिससे नियम भी लागू हों और कोई भूखा भी न रहे।

 

 

 

 

 

 

 

DPS Tv Bharat
Author: DPS Tv Bharat

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